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राव इंद्रजीत और राव नरबीर के बीच एक बार फिर जुबानी जंग राव नरबीर बोले, मैं मदद नहीं करता तो राव इंद्रजीत चुनाव नहीं जीतते राव इंद्रजीत बोले, जल्द करेंगे बड़ा खुलासा

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Rao Indrajeet V/s Rao Narbeer : हरियाणा की अहिरवाल की राजनीति में भाजपा में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के बीच जुबानी जंग इस समय अपने चरम पर है। दोनों नेता एक दूसरे को भाजपा की राजनीति में नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं रखते। जहां मानेसर में राव इंद्रजीत सिंह ने पार्टी लाइन से अलग होकर अपनी समर्थक को मेयर बनाने का काम किया वहीं राव नरबीर सिंह ने अपने दांव-पेंच खेलते हुए डिप्टी मेयर के चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह को बड़ी मात दे दी।
अब ताजा मामले में दोनों ने एक दूसरे पर बड़ी छींटाकशी की है।

क्या बोले राव नरबीर

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राज्य के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंदरजीत सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया होता तो इंद्रजीत इस बार लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाते। राव नरबीर ने कहा कि मैं खिलाफत करता तो वे चुनाव नहीं जीत पाते, क्योंकि बादशाहपुर से वे सवा लाख से ज्यादा वोट से जीते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मेरी कभी मदद नहीं की, लेकिन मुझे उनकी मदद की जरूरत भी नहीं है। मैं अपने दम पर और जनता के वोट पर चुनाव जीतता हूं। राव इंद्रजीत से उनकी कोई बातचीत नहीं होती और वे पांच साल में सिर्फ चुनाव के वक्त नामांकन के समय एक बार फोन करते हैं। नरबीर ने जोर देकर कहा कि इंद्रजीत को उनकी जरूरत है, लेकिन उन्हें इंद्रजीत की नहीं।

राव इंद्रजीत की प्रतिक्रिया

वहीं, राव इंद्रजीत सिंह ने पत्रकारों के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अभी इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन जल्द ही नरबीर के बारे में पूरा खुलासा करेंगे। उनके बयान से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर गर्म हो गया है। इंद्रजीत सिंह केंद्र में रक्षा राज्य मंत्री हैं, उन्होंने पहले भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े होने का दावा किया था।

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सियासी बैकग्राउंड

यह विवाद अहीरवाल बेल्ट की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता की याद दिलाता है। दोनों नेता यादव समुदाय से आते हैं और गुरुग्राम-रेवाड़ी इलाके में प्रभावशाली हैं। साल 2019 में भाजपा ने अपने सिटिंग एमएलए व मंत्री राव नरबीर सिंह का बादशाहपुर से टिकट काट दिया था। तब राव इंद्रजीत खेमे पर टिकट कटवाने का आरोप लगा। भाजपा ने मनीष यादव को टिकट दिया, हालांकि वो निर्दलीय राकेश दौलताबाद से हार गए थे। नरबीर ने इंद्रजीत को अपना राजनीतिक धुर विरोधी करार दिया था।
राव इंद्रजीत के पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे। किसी वक्त उनकी गिनती इंदिरा गांधी के करीबियों में होती थी। उन्होंने अपनी हरियाणा विशाल पार्टी का कांग्रेस में विलय किया था। राव इंद्रजीत उन्हीं की सियासी लीगेसी को बढ़ा रहे हैं। राव इंद्रजीत 6 बार के सांसद हैं।
दूसरी तरफ राव नरबीर का भी सियासी बैकग्राउंड मजबूत है। उनके दादा राव मोहर सिंह और पिता महाबीर सिंह भी सियासत में थे। राव नरबीर खुद 4 बार विधायक बने हैं और चारों बार मंत्री बने। वह जाटूसाना, सोहना और बादशाहपुर से विधायक बने हैं।

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